राज करने वाला डगमगा रहा है ! जोर लगाकर धक्का मारो! : राकेश सिंघा

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के 16वें अखिल भारतीय सम्मलेन के बाद शिमला में एक विशाल जनसभा हुई जिसे SFI के नेताओं के अलावा कामरेड राकेश सिंघा ने भी सम्बोधित किया। कामरेड सिंघा अपने हर भाषण में क्रांतिकारी धार और बेबाकीपन के लिए जाने जाते हैं। Socialist India कामरेड सिंघा का भाषण छाप रहा है। 

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आप 16वें अखिल भारतीय सम्मलेन अपने तक पहुँच गए हैं।  और, जब आपने यह किया तब देश वैसा नहीं है जैसा आपके 15 वे सम्मलेन के वक़्त था।  यह आपकेलिए समझना जरुरी है क्यूंकि आप स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया हैं।  आप कॉलेजों- यूनिवर्सिटियों में पढ़ने वाले हैं।  आप देश के अलग-अलग कोने से आए हैं।  आपको तय करना है कि देश किस ओर जाएगा।

 

ये समझने में मैं आपकी कुछ मदद करता हूँ। मैं समझता हूँ कि आज देश में एक क्रांतिकारी परिस्थिति है।  मैं क्यों कह रहा हूँ ऐसा ? एक दार्शनिक से जब पूछा गया कि क्रांति कब आएगी या क्रांतिकारी परिस्थिति कौन सी होती है तब उसने क्या कहा पता है ? उसने कहा कि जब शासन करने वाला पुराने तौर तरीके से शासन न कर पाए तो वो  परिस्थिति  कहलाती है।  पर, बस क्रांतिकारी परिस्थिति होने भर से बात नहीं बनती है।  शासक वर्ग डगमगाता तो है पर उसे ख़त्म करने के लिए ताकत चाहिए होती है।  मैं उम्मीद  करता हूँ कि आज के शासक वर्ग पर जोरदार प्रहार करने के लिए आप छात्र-नौजवान इस दिशा में आगे बढ़ेंगे।  इसी से देश में  एक बदलाव आ सकती है।

मैंने क्यों कहा कि राज करने वाला वर्ग पुराने तरीके से राज नहीं कर पा रहा है ? आपने देखा देश में पिछले दौर में रोहित वेमुला का आंदोलन हुआ, JNU में आद्नोलन हुआ , देश में जगह-जगह आंदोलन हुए , रोजी-रोटी-भविष्य के लिए आंदोलन हुए।  तब इन लोगों ने क्या कहा ? इन्हों कहा कि ये सब देशद्रोही हैं।  इन्होने क्यों सबको देशद्रोही कहा ? इन्होने इसलिए कहा क्यूंकि इनके पास उन मसलों का कोई जवाब ही नहीं है जो लोग उठा रहे हैं।

ये लोग सेडिशन का कानून लगाना  चाहते हैं।  सेडिशन का कानून हमारे देश में कौन लाया था ? ये लाया था अंग्रेज़ों ने जब भारत का मुक्ति संग्राम अपने चरम पर था।  उन्होंने इसका इस्तेमाल  भगत सिंह और उनके साथियों पर किया था।  आज ये लोग सेडिशन का कानून उन लोगों पर लगाना चाहते हैं जो रोज़गार की बात कर रहे हैं , जो शिक्षा की बात कर रहे हैं , जो बेहतर भारत चाहते हैं और जो पूछ रहे हैं कि ‘अमीर और अमीर क्यों , गरीब और गरीब क्यों ?’ इसलिए मैंने कहा कि राज करने वाला पुराने तरीके से राज नहीं कर पाता।  इनकी  सबसे महत्वपूर्ण संस्था सीबीआई पर आज सवाल उठ रहे हैं।  मोदी जी के  सबसे चहेते  अफसर पर सवाल उठ रहे हैं कि उसने करोड़ों रूपए डकार लिए।  इन्हे लगता था कि सुप्रीम कोर्ट इनकी जेब में है , पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कह दिया कि दस दिन के  भीतर जवाब दो उस  पैसे का जिसे डकार लिया गया है। यानि कि शासक वर्ग पुराने तरीके  से राज नहीं कर पा रहा है।

हरियाणा में पिछले दिनों मेहनतकशों ने बड़ी हड़तालें की – ट्रासंपोर्ट में की , बिजली में की।  संघर्ष का रास्ता अख्तियार किया।  सरकार ने इनके खिलाफ दमन का इस्तेमाल किया।  शासन करने वाला पुराने तरीकों से शासन करने में सफल नहीं हो पा रहा है।  इसलिए भाईयों और बहनों आपको इस लड़ाई  को आगे लेकर जाना होगा।

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मेरा मन कहता है कि स्टूडेंट्स ऑफ़ फेडरेशन समाज के बाकी तबके- मज़दूर, किसान, महिला, नौजवान , दलित, आदिवासी – इनकी लड़ाई के साथ अपने इंडिपेंडेंस, डेमोक्रेसी , सोशलिज्म के झंडे को लेकर आगे बढ़ेगा। आप शहादतें देंगे और एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जहाँ इंसान द्वारा इंसान का शोषण हमेशा के लिए ख़त्म हो जायेगा।

मैं आपका ध्यान कुछ चीज़ों के प्रति आकर्षित करना चाहता हूँ , मैं आपको जरा पीछे ले जाना चाहूंगा।  मोदी जी कहा करते थे – ‘ न खाऊंगा और न खाने दूंगा ‘ ।   हमें भी लगा कि यही सबसे बड़ा हरिश्चंद्र है।  फिर ये विजय माल्या कौन थे जो देश से 2000 करोड़ लेकर विदेश भाग गए ? कौन लगते थे ये आपके , मोदी जी ? आपके चाचा लगते थे , ताऊ लगते थे  या मामा लगते थे ? कौन लगते थे आपके जो मुल्क से पैसा लेकर भागने कि अनुमति दे दी ? नीरव मोदी कौन लगते थे आपके ? ये अडानी, अम्बानी कौन है ? ये अम्बानी वही है जिसने एक घाटे की कंपनी खरीदी और एक साल में ही 284 करोड़ मुनाफा कमा लिया।  ‘ न खाऊंगा और न खाने दूंगा ‘ ! वाह, मोदी जी, वाह !

आज असल में खाने का तरीका बदल गया है।  पहले तो सीधा खाते थे , अब बाईपास से खाते हैं।  और, अब खाया जाता है उस भैंसे जैसे पेट वाले द्वारा।  खोलिये इसका पेट और देखिये इसके भीतर कितना माल पड़ा हुआ है।  अमीर और अमीर हो रहा है , गरीब और गरीब हो रहा है।  मैं तो सुन्न हो गया एक आंकड़ा देख के।  आकंड़ा मेरा नहीं है , आरबीआई का है।  आरबीआई यानिकि केंद्रीय बैंक – इसने बताया की अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी की कितनी कमी है।  लिक्विडिटी होगी तो बाजार में पैसा आएगा , वरना नहीं आएगा। आप लिक्विडिटी को मानेंगे कि नहीं मानेंगें ?

ये सब हो क्यों रहा है ? ये सब हो रहा है विकास के रास्ते के चलते। कौन सा विकास का रास्ता ? पूंजीवादी विकास का रास्ता। अभी पिछले दौर में देश में नवउदारवादी विकास का नया रास्ता अपनाया गया।  ये रास्ता क्या है ? जिन बातों को लेकर स्वतंत्रता सेनानियों ने कुर्बानियां दी , अंग्रेज़ों के , राजाओं ,रजवाड़ों के राज को ख़त्म किया , देश में संविधान को लागू किया – जिस संविधान में शिक्षा, स्वास्थ्य और बाकी तमाम सुविधाएं राज्य की जिम्मेदारी थी।  उस सब को ख़त्म किया जा रहा है।  नवउदारवादी विकास का रास्ता कहता है कि ये सब सौंप दो।  किसके हाथों में सौंप दो ? मोदी जी के चाचा- ताऊ के हाथों में सौंप दो।  अडानी अम्बानी को सौंप दो।  शिक्षा सौंप दो , स्वस्थ्य सौंप दो , बिजली सौंप दो , पीने का पानी भी सौंप दो।

और, अब सब जानते हैं कि इस नवउदारवादी विकास के रास्ते का सीरियस एक्सीडेंट हो गया है।  इसका सीरियस एक्सीडेंट हो गया है और आज ये अपनी आखिरी सांसें ले रहा है।  सीरियस एक्सीडेंट होनेपर मरीज को आईसीयू में भर्ती किया जाता है।  आज नवउदारवादी विकास का रास्ता आईसीयू में आखिरी सांसें ले रहा है।  इसकी मौत तो निश्चित है , बस जरुरत है बिजली का कनेक्शन काटने की।  और ये बिजली का कनेक्शन काटेंगे छात्र, मज़दूर, किसान , नौजवान और ये बिजली काटेंगे वो जिनको सामाजिक शोषण का सबसे अधिक सामना करना पड़ता है यानिकि महिलाएं, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक।  ये सब मिलकर इसका बिजली का कनेक्शन काटेंगे और एक नए भारत का निर्माण करेंगे। आप कुर्बानियां देंगे।  एक अभिमन्यु नहीं अनेक अभिमन्यु होंगे।  क्यों होंगे ? क्यूंकि हम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की विरासत को आगे लेकर जाने वाले लोग हैं।  हम यह विरासत आगे लेकर क्यों जा रहे हैं ? क्यूंकि हम चाहते हैं इंसान द्वारा इंसान का शोषण ख़त्म हो।

आज कल बहुत चर्चा चल रही है।  चर्चा चल रही है मीडिया में और दिल्ली के नेताओं में कि आगे क्या होगा।  अरे, आगे क्या होगा ये तो अवाम ने बता दिया है।  देश की अवाम ने बता दिया है कि इनकी छुट्टी होगी।  आप भी देश की अवाम के साथ अपनी आवाज़ मिलाते हुए आगे बढ़ेंगे इसका मुझे भरोसा है।  आने वाले दिनों की लड़ाईयों के लिए मेरी शुभकामनाएं आपको।

इंक़लाब ज़िंदाबाद।