‘भाजपा हटाओ , देश बचाओ’ रैली में कामरेड मोहम्मद सलीम का भाषण

Socialist India 25 अक्टूबर को पटना में आयोजित ‘भाजपा हटाओ देश बचाओ ‘ में सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो सदस्य और लोकसभा सांसद कामरेड मोहम्मद सलीम का भाषण आप के सामने प्रस्तुत कर रहा है।

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किसान, खेतिहर मज़दूर, दिहाड़ी मज़दूर, प्रवासी मज़दूर, महिला, छात्र, नौजवान, दलित, आदिवासी, मध्यम वर्ग, शिक्षक , कर्मचारी – आज इस देश में कोई भी खुश हाल नहीं है।  अच्छे दिन आए हैं तो बस संघ परिवार और उसके चट्टे- बट्टों के लिए।  इन्होने हर जगह लूट मचा रखी है।  देश की आम जनता की गाढ़ी कमाई को ये लूटे जा रहे हैं।  और, इस लूट पर कार्रवाई न हो इसलिए देश के चौकीदार यानिकि सीबीआई के डायरेक्टर को ही बदल दिया गया।  प्रधानमंत्री जी अपने आप को देश का चौकीदार कहते हैं और वो खुद रात के 2 बजे सीबीआई के डायरेक्टर को बदल देते हैं।  नोटेबंदी हुई थी रात के 12 बजे और अब सीबीआई के डायरेक्टर को बदला गया रात के 2 बजे।  आखिर इनकी मंशा क्या है ? हमारे देश में कभी भी ऐसा नहीं हुआ है।

कामरेड सुधाकर रेड्डी को आपने सुना।  उन्होंने बताया कैसे रोज टेलीविज़न से और लाल किले से देश की सुरक्षा के बारे में भाषण दिया जाता है।  पर, इन्होने देश की सुरक्षा के साथ क्या किया है ? राफेल जो एक लड़ाकू विमान है , उसके सौदे में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है।  पहले जब कोई भी रक्षा सौदा होता तो दलाल ढूंढा जाता था , अब तो हालत ये है कि देश का प्रधानमन्त्री खुद अनिल अम्बानी के लिए दलाली कर रहा है।

और, अगर कोई इनसे सवाल पूछे तो इनके अजीब हथकंडे हैं। क्या हैं इनके हथकंडे?

कहते थे कि विदेश से कालाधन लाएंगे , और यहीं के बैंकों का पैसा लूट लूट के लोग विदेश भाग रहे हैं।  चाहे वित्त मंत्री अरुण जेटली हों यान प्रधानमंत्री मोदी – ये सब भागने वाले इनके ही दोस्त हैं।  चाहे मेहुल भाई हों, विजय माल्या हो या फिर नीरव मोदी – आप किसी को भी उठा कर देख लीजिये।  ये सब भगौड़े कौन हैं ? ये सब देश को लूटने वाले हैं।  और जो अपना खून – पसीना बहाकर मज़दूरी करते हैं , जमीन में फसल उपजाते हैं वो जब अपना हक़ मांगते हैं – अपनी दिहाड़ी मांगते हैं , अपने फसल का सही दाम मांगते हैं , जमीन का अधिकार, सिंचाई की सुविधा मांगते हैं – तो उन्हें क्या कहा जाता है ? उन्हें कहा जाता है कि – “तुम पाकिस्तानी हो ! पाकिस्तान चले जाओ! ” JNU के छात्र जब अपना स्टिपेन्ड, अपना स्कालरशिप मांगते हैं , नौजवान जब अपना रोज़गार मांगते हैं तब ये टीवी वाले कहते हैं कि ” आईये जानते हैं कि कौन है देशभक्त और कौन देशद्रोही ?” असली देशभक्त टीवी वालों तुमसे नहीं मिलेगा।  हम वामपंथी कहते हैं कि कौन देशभक्त है और कौन देशद्रोही है – ये पता करना बेहद आसान है।  जो देश के जनता की एकता मजबूत करे वो देशभक्त है , और  जो देश के जनता की एकता को तोड़े वो है देशद्रोही।

2018 के 1  जनवरी को महाराष्ट्र के भीमकोरेगांव में हमारे दलित भाई अपना कार्यक्रम मना रहे थे।  वो कई सालों से ये कार्यक्रम करते आए हैं।  इस बार संघ परिवार के लोगों ने उन पर अत्याचार किया और उल्टे दलितों पर ही फ़र्ज़ी मुक़दमे लगा दिए।  इस हमले में नरेंद्र मोदी के साथ दिखने वाला वह संत भी है – जो संत तो क्या असल में शैतान है।  जिग्नेश पर भी मुकदमा किया गया।  पर, हम वामपंथी इन फ़र्ज़ी मुकदमों से कभी नहीं डरते हैं।  आईये यहाँ जो हम आए हैं , संघर्ष का बिगुल बजाएं मिलकर।  देश की जनता और खासकर नौजवान मिलकर इस सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प करें।  नौजवानों के साथ इस सरकार बहोत बड़ा धोखा किया है।  वादा था हर साल २ करोड़ नौकरी का , यानिकि ५ साल में १० करोड़ बेरोज़गारों को रोज़गार मिलना चाहिए था।  पर, मिला  कितने को ? नोटेबंदी, जीएसटी, कमज़ोर रूपया, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम इस सब से छोटे कारोबार सब एकदम बर्बाद हो गए हैं।  और जब लोग पूछते हैं कि नौकरी कहाँ है ? जब जनता कहती है कि ” जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा ” और ” क्या हुआ तेरा वादा?” तब अमित शाह आकर कहता है कि वो सब तो जुमला था।  अब ये जुमला शब्द उर्दू का है।  ये संघ परिवार वाले हमेशा संस्कृत वाली हिंदी में बोलते हैं , पर जब भी इन्हे कुछ नेगेटिव बोलना होता है तब ये उर्दू और फ़ारसी के शब्द ढूंढ़ने लगते हैं।

ये इनका सब जुमलेबाजी हम 2019 में निकाल देंगे। जैसे सरसों को निचोड़ कर तेल निकाला जाता है, वैसे ही 2019 में हम इन लूटेरों को निचोड़ कर लूट का एक-एक पैसा निकालेंगे- बैंक लूट का पैसा, मज़दूरी के लूट का पैसा, दिहाड़ी के लूट का पैसा, फसल के दाम के लूट का पैसा , एक एक पैसा वापस निकालेंगे।

ये काम लाल झंडा ही करेगा।  आज 25 अक्टूबर है – आज ही के दिन मशहूर शायर साहिर लुधयानवी हमसे दूर चले गए थे।  साहिर की एक नज़्म की लाइन है एक – ” वो सुबह कभी तो आएगी ” ।  वो लाल सूरज वाली सुबह लाल झंडे से ही आएगी।  इस देश में जब भी मुसीबत आयी है तब मज़दूर-किसान और उनका लाल झंडा ही सामने आया है – चाहे अंग्रेज़ों का राज हो या फिर जम्हूरियत पर हमला या कोई भी और संकट हो लाल झंडा हमेशा सामने रहा है।  हम उन सब को साथ लाएंगे जो भाजपा के खिलाफ रहे हैं , जो रहेंगे , कई ऐसे भी हैं जो उधर गए थे , पर अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हो रहा है।  पर इस नितीश सरकार को तो एकदम नहीं साथ लाने का सवाल उठता है।  अगर मोदी ने देश के साथ धोखा किया , तो नितीश ने बिहार की जनता के साथ धोखा किया है – पहले भाजपा के खिलाफ वोट ले लिया, और बाद में उसी के साथ जाकर मिल गया।

पहले कुछ भाजपा समर्थक कहते थे कि चलो अच्छा हुआ अब ये संघ परिवार आ गया पावर में , अब कश्मीरियों को टाइट करेगा, मुसलमानों को टाइट करेगा , दलितों को टाइट करेगा।  पर गुजरात में क्या हुआ अभी? पुरबिये के नाम पर बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बंगाल हर कहीं के मज़दूर को मार- मार के भगाया गया।

पटना का यह गाँधी मैदान साक्षी रहा है देश में जब-जब बड़ी लड़ाई लड़ी गयी तब यहीं से शंख फूँका  गया।  जब- जब बिहार उठ के खड़ा हुआ है , तब तब देश ने नयी करवट ली है।  यहाँ एक साथी कह रहे थे कि कंश का वध करने के लिए कन्हैया आता है।  अरे यहाँ तो राम ( आरजेडी के नेता ) भी है , कन्हैया भी है और मोहम्मद ( कामरेड सलीम खुद ) – तीनो है ! इस संघ परिवार और भाजपा के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ी जाएगी और उसे जीता जायेगा।  मैं अपनी बात इन दो लाइनों  के साथ ख़त्म करूँगा :

” इतने बाजू इतने सर, गिन ले दुश्मन ध्यान से

हारेगा वो हर बाज़ी जब खेले हम जी-जान से ”

 

इंक़लाब ज़िंदाबाद !

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